बॉलीवुड के सदाबहार अभिनेता धर्मेंद्र ने अपने छह दशक लंबे करियर में जितनी शोहरत कमाई, उससे कहीं ज्यादा विशाल संपत्ति अर्जित की। अनुमानित 450 करोड़ रुपये की इस दौलत के बंटवारे को लेकर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
संपत्ति के प्रमुख घटक
धर्मेंद्र की संपत्ति में शामिल हैं:
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मुंबई के पोइसर और बांद्रा में लग्जरी बंगले
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लंदन और दुबई में अचल संपत्ति
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पंजाब में हजारों एकड़ कृषि भूमि
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विजयता फिल्म्स सहित अन्य व्यवसायिक उद्यम
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विंटेज कारों का दुर्लभ संग्रह
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बेशकीमती जेवरात और आर्ट कलेक्शन
विरासत के दावेदार
इस विशाल संपत्ति के छह प्रमुख दावेदार हैं:
पहले परिवार से:
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सनी देओल: सबसे बड़े बेटे के रूप में प्रमुख दावेदार
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बॉबी देओल: दूसरे बेटे के तौर पर बराबर की हिस्सेदारी
दूसरे परिवार से:
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ईशा देओल: बेटी होने के नाते कानूनी हकदार
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अहाना देओल: छोटी बेटी भी विरासत में हिस्से की दावेदार
विशेष स्थिति:
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हेमा मालिनी: पत्नी के रूप में महत्वपूर्ण हिस्से की हकदार
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प्रकाश कौर: पहली पत्नी के रूप में सम्मानजनक हिस्सा
कानूनी पहलू और चुनौतियां
संपत्ति बंटवारे को लेकर कई कानूनी पहलू सामने आ रहे हैं:
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वसीयत की उपलब्धता: अभी तक कोई आधिकारिक वसीयत सार्वजनिक नहीं
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हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम: वसीयत न होने की स्थिति में लागू होगा
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दो परिवारों में समन्वय: सबसे बड़ी चुनौती
संभावित बंटवारा संरचना
विशेषज्ञों के अनुसार, संपत्ति का बंटवारा इस प्रकार हो सकता है:
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पत्नियों का हिस्सा:
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हेमा मालिनी: संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा
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प्रकाश कौर: सम्मानजनक और उचित हिस्सा
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बच्चों का हिस्सा:
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चारों बच्चों में बराबर बंटवारा
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व्यक्तिगत उपहार और विशेष व्यवस्थाएं
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विशेष व्यवस्थाएं:
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पोते-पोतियों के लिए ट्रस्ट
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चैरिटेबल उद्देश्यों के लिए फंड
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भावनात्मक पहलू
धर्मेंद्र का निधन न सिर्फ एक युग का अंत है, बल्कि एक पारिवारिक विरासत के हस्तांतरण का भी समय है। दोनों परिवारों के बीच संबंधों को इस कठिन समय में और मजबूत होने की आवश्यकता है।
व्यवसायिक हितों का संरक्षण
धर्मेंद्र द्वारा स्थापित व्यवसायिक हितों को संभालना एक महत्वपूर्ण चुनौती होगी:
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फिल्म निर्माण कंपनियों का प्रबंधन
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रियल एस्टेट निवेशों का रखरखाव
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कृषि भूमि का प्रबंधन
सामाजिक महत्व
यह मामला न सिर्फ एक पारिवारिक विरासत का प्रश्न है, बल्कि इससे समाज में भी एक संदेश जाता है कि कैसे बड़े परिवारों में संपत्ति के बंटवारे को संभाला जाना चाहिए।
निष्कर्ष
धर्मेंद्र की विरासत का बंटवारा न सिर्फ वित्तीय मामला है, बल्कि उनके जीवन दर्शन और पारिवारिक मूल्यों का प्रतिबिंब भी होगा। उम्मीद की जानी चाहिए कि यह प्रक्रिया शांतिपूर्ण और पारदर्शी होगी, जिससे धर्मेंद्र की स्मृति को उचित सम्मान मिल सके।